Leela Chirantan

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Leela Chirantan

Number of Pages : 140
Published In : 2009
Available In : Hardbound
ISBN : 978-81-263-1831-5
Author: Ashapurna Devi

Overview

व्यक्ति द्वारा अपनी गृहस्थी का सब कुछ छोड़कर अचानक सन्यास ले लेने से उपजी सामाजिक और सांसारिक तकलीफों के बहाने आसपास का बहुत कुछ देखने-समझने की गंभीर कोशिश है यह उपन्यास 'लीला चिरंतन'! ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित बांग्ला की यशस्वी कथा लेखिका आशापूर्ण देवी ने इस विचित्र परिस्थितियों को कई प्रश्नों और पत्रों के माध्यम से उपन्यास में जीवन किया है! उपन्यास की नायिका कावेरी जो आत्मविश्वास से भरी पूरी है तमाम सामाजिक प्रश्नों से निरंतर जूझती रहती है और उन रुढियों से भी लगातार लड़ती रहती हैं. जो उसे जटिल सीमाओं में बांधे रखना चाहती है ! उपन्यास में इस पूरी नाटकीय किन्तु विश्वसनीय परिस्थिति को कावेरी की युवा और अल्हड बेटी प्रस्तुत करती है, साथ ही सारे परिदृश्य को भी अपने अनुभवों के आधार पर व्यक्त करती जाती है ! कहना न होगा कि एक युवा किशोरी के देखे भोगे अनुभवों में गहरे उतरना इस 'लीला चिरंतन' को रोचक और उत्तेजक संस्पर्श देता है ! समकालीन मध्यवर्गी जीवन और सामाजिक मानस की यथार्थ छवियों की प्रस्तुत करने के कारण यह उपन्यास अपने समय का जीवन एवं प्रमाणिक दर्पण बन गया  है ! बांग्ला पाठकों के बीच पहले से ही बहुचर्चित यह उपन्यास हिंदी पाठकों में भी उतना ही समादृत हुआ है !

Price     Rs 110

व्यक्ति द्वारा अपनी गृहस्थी का सब कुछ छोड़कर अचानक सन्यास ले लेने से उपजी सामाजिक और सांसारिक तकलीफों के बहाने आसपास का बहुत कुछ देखने-समझने की गंभीर कोशिश है यह उपन्यास 'लीला चिरंतन'! ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित बांग्ला की यशस्वी कथा लेखिका आशापूर्ण देवी ने इस विचित्र परिस्थितियों को कई प्रश्नों और पत्रों के माध्यम से उपन्यास में जीवन किया है! उपन्यास की नायिका कावेरी जो आत्मविश्वास से भरी पूरी है तमाम सामाजिक प्रश्नों से निरंतर जूझती रहती है और उन रुढियों से भी लगातार लड़ती रहती हैं. जो उसे जटिल सीमाओं में बांधे रखना चाहती है ! उपन्यास में इस पूरी नाटकीय किन्तु विश्वसनीय परिस्थिति को कावेरी की युवा और अल्हड बेटी प्रस्तुत करती है, साथ ही सारे परिदृश्य को भी अपने अनुभवों के आधार पर व्यक्त करती जाती है ! कहना न होगा कि एक युवा किशोरी के देखे भोगे अनुभवों में गहरे उतरना इस 'लीला चिरंतन' को रोचक और उत्तेजक संस्पर्श देता है ! समकालीन मध्यवर्गी जीवन और सामाजिक मानस की यथार्थ छवियों की प्रस्तुत करने के कारण यह उपन्यास अपने समय का जीवन एवं प्रमाणिक दर्पण बन गया  है ! बांग्ला पाठकों के बीच पहले से ही बहुचर्चित यह उपन्यास हिंदी पाठकों में भी उतना ही समादृत हुआ है !
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